चीन की संसद ने पंचवर्षीय योजना को दी मंजूरी, तकनीक विकास पर सबसे ज्यादा जोर

दुनिया का ध्यान जहां इस समय Middle East में जारी संघर्ष पर है, वहीं China अपनी आर्थिक और तकनीकी योजनाओं को आगे बढ़ाने में लगा हुआ है। चीन की संसद National People’s Congress ने नई पंचवर्षीय योजना को मंजूरी दे दी है, जिसमें तकनीकी विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

अमेरिका से तकनीकी प्रतिस्पर्धा

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन का सबसे बड़ा रणनीतिक मुकाबला United States से माना जा रहा है। यह प्रतिस्पर्धा खासकर नई और आधुनिक तकनीकों के विकास को लेकर है, जो 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति संतुलन को तय कर सकती हैं।

चीनी सरकारी मीडिया People’s Daily ने लिखा कि एक स्थिर और विकासशील चीन वैश्विक अस्थिरता के दौर में स्थिरता और भरोसे का केंद्र बन सकता है। रिपोर्टों में वैश्विक व्यापार तनाव और सैन्य संघर्षों का जिक्र किया गया, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया।

ट्रंप का संभावित बीजिंग दौरा

रिपोर्ट के अनुसार आने वाले हफ्तों में डोनाल्ड ट्रंप Beijing का दौरा कर सकते हैं, जहां उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से होने की संभावना है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, तकनीक और वैश्विक राजनीति पर चर्चा हो सकती है।

भारी बहुमत से पारित हुई योजना

नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में इस पंचवर्षीय योजना के पक्ष में 2,758 वोट पड़े, जबकि केवल एक सदस्य ने विरोध किया और दो सदस्यों ने मतदान से दूरी बनाई। इस तरह के मतदान को आम तौर पर औपचारिक माना जाता है, जिसका उद्देश्य सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के समर्थन को दिखाना होता है।

तकनीक और एआई पर निवेश

चीन की नई योजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स और अन्य उन्नत तकनीकों में बड़े पैमाने पर निवेश करने की रणनीति शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन धीरे-धीरे घरेलू खपत बढ़ाने और सामाजिक सुरक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी ध्यान देगा।

चीन के प्रधानमंत्री Li Qiang ने 2026 के लिए 4.5% से 5% तक आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य थोड़ा कम रखा गया है ताकि सरकार दीर्घकालिक विकास रणनीति पर ध्यान केंद्रित कर सके।

जलवायु नीति पर सतर्क रुख

नई पंचवर्षीय योजना में कुल कार्बन उत्सर्जन कम करने का सीधा वादा नहीं किया गया है। इसके बजाय उत्सर्जन की तीव्रता घटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य के तहत उत्सर्जन तीव्रता में 17% कमी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे कुल कार्बन उत्सर्जन में करीब 3% या उससे अधिक वृद्धि भी हो सकती है, यदि अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है।

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