
होली का पावन पर्व हर वर्ष फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। देशभर में रंग, गुलाल और उत्साह के साथ यह त्योहार मनाया जाता है, लेकिन भारत में ही कुछ ऐसे स्थान हैं जहां वर्षों से होली नहीं मनाई जाती। इन स्थानों के पीछे स्थानीय मान्यताएं और ऐतिहासिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं।
1. Dusepur, हरियाणा
हरियाणा के दुसेरपुर गांव में पिछले लगभग 300 वर्षों से होली नहीं मनाई गई है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, एक बार होली के अवसर पर गांववासियों ने एक साधु का अपमान कर दिया था। इससे क्रोधित होकर साधु ने गांव को श्राप दिया कि यहां कभी होली नहीं मनाई जाएगी। तब से आज तक ग्रामीण इस परंपरा का पालन कर रहे हैं।
2. Khurjan और Kwili, उत्तराखंड
उत्तराखंड के खुरजान और क्विली गांवों में करीब 150 वर्षों से होली का त्योहार नहीं मनाया जाता। यहां के लोगों की मान्यता है कि उनकी कुलदेवी त्रिपुर सुंदरी को शोर-शराबा पसंद नहीं है। यदि गांव में होली खेली गई तो देवी रुष्ट हो सकती हैं और गांव पर विपत्ति आ सकती है। इसी विश्वास के चलते आज भी यहां होली नहीं मनाई जाती।
3. Durgapur, झारखंड
झारखंड के दुर्गापुर में भी होली नहीं मनाई जाती। स्थानीय लोगों के अनुसार, होली के दिन यहां के राजा दुर्गा प्रसाद की हत्या रामगढ़ के राजा द्वारा की गई थी। इसके बाद से गांव में होली मनाना बंद कर दिया गया। कहा जाता है कि लगभग 100 साल बाद कुछ खानाबदोश मल्हारों ने यहां होली मनाने की कोशिश की, लेकिन उसी दिन दो लोगों की मृत्यु हो गई और गांव में महामारी फैल गई। तब से लोग इसे अशुभ मानते हैं और आज भी होली से दूरी बनाए रखते हैं।
4. Ramsan, गुजरात
गुजरात के रामसन गांव में करीब 200 वर्षों से होली नहीं मनाई गई है। मान्यता है कि होलिका दहन के दिन गांव में भीषण आग लग गई थी, जिससे कई घर जलकर राख हो गए थे। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने होली मनाना बंद कर दिया।




