पुलिस की सशक्त विवेचना से न्याय की जीत, सगे भाई की हत्या में आरोपी को आजीवन कारावास

जूटमिल के तरकेला में होली की रात हुई सनसनीखेज हत्या का फैसला

कानून की पकड़ और मजबूत—उप निरीक्षक गिरधारी साव की विवेचना से लगातार पाँचवें गंभीर प्रकरण में दोषसिद्धि

रायगढ़, 18 जनवरी।
गंभीर अपराधों में अपराधियों को कठोर दंड दिलाने की दिशा में रायगढ़ पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस अधीक्षक श्री दिव्यांग कुमार पटेल के निर्देशन में की गई सशक्त और वैज्ञानिक विवेचना के चलते जूटमिल थाना क्षेत्र के बहुचर्चित हत्या प्रकरण में न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

दिनांक 16 जनवरी 2026 को माननीय सत्र न्यायाधीश श्री जितेन्द्र कुमार जैन, रायगढ़ ने थाना जूटमिल अंतर्गत ग्राम तरकेला में हुई हत्या के मामले में आरोपी सुनील कुमार दास पिता पंचराम महंत, उम्र 28 वर्ष को अपने ही सगे छोटे भाई निर्मल दास की हत्या का दोषी करार दिया। न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास एवं ₹50 अर्थदंड से दंडित किया।
प्रकरण की विवेचना तत्कालीन उप निरीक्षक गिरधारी साव द्वारा की गई, जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक श्री पी.एन. गुप्ता ने सशक्त पैरवी प्रस्तुत की।


होली की खुशियां मातम में बदलीं, घरेलू विवाद बना हत्या की वजह

प्रकरण के अनुसार पंचराम महंत एवं उनकी पत्नी भानुमति के तीन पुत्र—निमाई दास, सुनील दास (आरोपी) एवं निर्मल दास (मृतक) हैं।
दिनांक 14 मार्च 2025, होली पर्व की रात्रि करीब 8 बजे, सुनील और निर्मल के बीच घरेलू विवाद हुआ। परिजनों द्वारा समझाने के बावजूद आरोपी ने आपा खो दिया और लकड़ी के डंडे से सिर, हाथ व पैरों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे निर्मल दास की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

मृतक के पिता की रिपोर्ट पर थाना जूटमिल में मर्ग क्रमांक 27/2025 दर्ज कर शव पंचनामा व पोस्टमार्टम कराया गया। बाद में अपराध क्रमांक 75/2025, धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत मामला कायम किया गया।


मजबूत विवेचना, ठोस साक्ष्य और 14 गवाहों की प्रभावी गवाही

उप निरीक्षक गिरधारी साव ने घटनास्थल निरीक्षण, भौतिक साक्ष्य संकलन, चिकित्सकीय रिपोर्ट, गवाहों के बयान एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को वैज्ञानिक ढंग से संकलित कर एक मजबूत अभियोजन केस तैयार किया।
न्यायालय में 14 गवाहों की सशक्त गवाही से अभियोजन ने आरोपी का अपराध संदेह से परे सिद्ध किया।

हालांकि आरोपी ने स्वयं को निर्दोष बताया, लेकिन न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह कृत्य मानव वध नहीं बल्कि पूर्ण हत्या की श्रेणी में आता है।


मिथ्या बयान पर पिता के विरुद्ध भी सख्ती

विचारण के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि मृतक व आरोपी के पिता पंचराम महंत (70 वर्ष) ने आरोपी को बचाने के उद्देश्य से न्यायालय में पूर्व कथनों के विपरीत मिथ्या बयान दिया। इस पर माननीय सत्र न्यायाधीश ने उनके विरुद्ध धारा 383 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत कार्रवाई के निर्देश दिए।


गंभीर अपराधों में बढ़ रही सजा की दर

वर्तमान में थाना लैलूंगा में प्रभारी के रूप में पदस्थ उप निरीक्षक गिरधारी साव की विवेचना में हत्या, दुष्कर्म एवं पोक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में लगातार दोषियों को कठोर सजा मिल रही है। यह प्रकरण उनकी विवेचना से पाँचवां गंभीर मामला है, जिसमें आरोपी को सजा हुई है।

जिले में गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि की बढ़ती दर रायगढ़ पुलिस की पेशेवर विवेचना, प्रभावी अभियोजन और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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