रेगड़ा हादसे के बाद पालीघाट चक्काजाम: तमनार के जननेता रमेश बेहरा ने निभाई बड़ी जिम्मेदारी

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अशोक सारथी, आपकी आवाज  न्यूज धौंराभांठा:- जिले के उड़ीसा मार्ग से जोड़ने वाली सड़क में बंगुरसिंया के पास स्थापित शाकांबरी पावर प्लांट में कार्यरत रेगड़ा निवासी युवक योगेश राठिया उम्र 25 वर्ष की शनिवार को हुए भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई। रायगढ़ की ओर जा रहे तेज रफ्तार टेलर क्रमांक-CG 04 5907 ने बटरफ्लाई मोड़ के पास योगेश की बाइक को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इस हादसे से आक्रोशित ग्रामीणों ने पालीघाट पर शव रखकर घंटों चक्काजाम किया।



मौके पर पहुंचे तमनार के लोकप्रिय नेता रमेश बेहरा

इस तनावपूर्ण माहौल में जिस नेता ने सबसे पहले ज़मीनी स्तर पर सक्रियता दिखाई, वह थे तमनार क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य रमेश बेहरा। घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने देर न करते हुए तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर ना सिर्फ पीड़ित परिवार से मुलाकात की, बल्कि चक्काजाम कर रहे ग्रामीणों के साथ धरने में बैठ गए।



जनता के साथ खड़े नजर आए बेहरा

रमेश बेहरा ने मौके पर पहुंचकर साबित कर दिया कि वे सिर्फ जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि हर दुःख-सुख में साथ निभाने वाले जननेता हैं। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे संवाद कर तत्काल राहत की मांग रखी और ट्रांसपोर्टर से भी बातचीत कर मुआवजे की पहल की। उनकी इस तत्परता से लोगों को भरोसा हुआ कि वे अकेले नहीं हैं।



प्रशासन और ट्रांसपोर्टर से कराई बातचीत, मिला भरोसा

करीब तीन घंटे तक चले इस चक्काजाम को समाप्त कराने में रमेश बेहरा की भूमिका निर्णायक रही। उन्होंने शांतिपूर्ण वार्ता का मार्ग अपनाते हुए प्रशासन को ग्रामीणों की पीड़ा समझाई और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलवाया।

तमनार से लेकर रेगड़ा तक भरोसे का नाम बन चुके हैं रमेश बेहरा

इस पूरे घटनाक्रम में रमेश बेहरा ने जिस तरह संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया, उसने उन्हें सिर्फ तमनार ही नहीं, रेगड़ा और पाली क्षेत्र में भी विश्वास और संघर्ष की पहचान बना दिया है।

जब तक न्याय नहीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा” – रमेश बेहरा

अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा, “इस प्रकार की लापरवाह ड्राइविंग और हादसों पर लगाम लगाने के लिए कड़े कदम जरूरी हैं। मैं पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने तक साथ रहूंगा।
रमेश बेहरा जैसे जनप्रतिनिधि आज की राजनीति में उम्मीद की किरण हैं, जो शब्दों से नहीं, कर्म से जनता के साथ खड़े नजर आते हैं।

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