SECL कर्मचारी के हक में CGIT जबलपुर का फैसला, गलत जन्मतिथि के आधार पर सेवानिवृत्ति को माना गैरकानूनी
रायगढ़/जबलपुर। केंद्रीय सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण (CGIT), जबलपुर ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के चिरमिरी क्षेत्र से जुड़े एक मामले में कामगार बारेलाल के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायाधिकरण ने प्रबंधन द्वारा मेडिकल जांच के आधार पर दर्ज की गई जन्मतिथि को आधार बनाकर समय से पहले सेवानिवृत्त करने की कार्रवाई को गलत ठहराते हुए स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज जन्मतिथि को मान्य करने का निर्देश दिया है।
न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी पी.के. श्रीवास्तव, एचजेएस (सेवानिवृत्त) ने अपने पंचाट में निर्देश दिया कि कुरासिया कॉलरी में सहायक फोरमैन के पद पर कार्यरत बारेलाल की जन्मतिथि 2 जनवरी 1960 मानी जाए।
मेडिकल रिकॉर्ड की जगह स्कूल प्रमाणपत्र को माना आधार
मामले के अनुसार, बारेलाल की वर्ष 1983 में नियुक्ति के समय मेडिकल जांच के आधार पर जन्मतिथि 26 सितंबर 1957 दर्ज की गई थी। वहीं, कर्मचारी ने रोजगार कार्यालय और कार्यभार ग्रहण करते समय अपना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया था, जिसमें जन्मतिथि 2 जनवरी 1960 दर्ज थी।
कर्मचारी ने बाद में जन्मतिथि में सुधार की मांग उठाई। बताया गया कि उन्होंने सेवा के करीब नौ वर्ष बाद वर्ष 1992 में ही जन्मतिथि सुधारने के लिए आवेदन दिया था। इसके बावजूद प्रबंधन की ओर से इस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई और बाद में उन्हें दर्ज जन्मतिथि के आधार पर समय से पहले सेवानिवृत्त करने की स्थिति बनी।
पूर्ण वेतन और सेवा लाभ देने का आदेश
न्यायाधिकरण ने कर्मचारी को सही जन्मतिथि के आधार पर सेवा में निरंतर मानते हुए पूर्ण बकाया वेतन और अन्य सेवाकालीन तथा सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ देने का निर्देश दिया है।
पंचाट के अनुसार, प्रबंधन को आदेश की तारीख से 90 दिनों के भीतर देय लाभों का भुगतान करना होगा। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का प्रावधान किया गया है।
Implementation Instruction 76 का दिया हवाला
न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में Implementation Instruction No. 76 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षित कर्मचारी की जन्मतिथि निर्धारित करने के लिए मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान से जारी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट को आधार माना जाना चाहिए।
मामले में कर्मचारी द्वारा नियुक्ति के समय ही स्कूल प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए जाने के तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी उल्लेख
न्यायाधिकरण ने अपने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय के दीपाली गुंडू सुरवासे और हिंदुस्तान टिन वर्क्स से जुड़े फैसलों का भी उल्लेख किया। इन न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर गलत तरीके से सेवा समाप्ति या सेवानिवृत्ति की स्थिति में सेवा की निरंतरता और बकाया वेतन जैसे राहत के सिद्धांतों पर विचार किया गया।
कामगार के पक्ष में यह मामला राष्ट्रीय कोलियरी वर्कर्स फेडरेशन की ओर से भी उठाया गया था। संगठन ने फैसले को श्रमिक अधिकारों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया है।











