रायगढ़ में चाचा-भतीजे का मकान विवाद: कोर्ट के आदेश पर टूटा घर, 10 साल पुराना मामला खत्म

सरकारी आवंटित जमीन पर बने मकान को लेकर पारिवारिक विवाद, मामला पहुंचा न्यायालय तक

रायगढ़। रायगढ़ जिले में चाचा-भतीजे के बीच वर्षों से चला आ रहा मकान विवाद आखिरकार न्यायालय के आदेश के बाद समाप्त हो गया। मामला उस जमीन से जुड़ा है, जो वर्ष 1998 में शासकीय सेवा के दौरान रामचंद्र केसरवानी को आवंटित हुई थी।


निसंतान चाचा ने भतीजे को रहने और निर्माण की दी थी अनुमति

जानकारी के अनुसार, रामचंद्र केसरवानी निसंतान थे, जिसके चलते उन्होंने अपने भतीजे रविन्द्र केसरवानी को उक्त जमीन पर मकान बनाकर रहने की अनुमति दी थी। शुरुआती सहमति बाद में बड़े विवाद का कारण बन गई।


2014 में जमीन वापस लेने के लिए कोर्ट पहुंचे रामचंद्र केसरवानी

वर्ष 2014 में रामचंद्र केसरवानी ने अपनी संपत्ति वापस लेने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली और स्वामित्व को लेकर सुनवाई होती रही।


न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने कराया मकान ध्वस्त, कब्जा सौंपा गया

न्यायालय ने अंतिम सुनवाई में रामचंद्र केसरवानी के पक्ष में फैसला सुनाया और विवादित मकान को हटाकर कब्जा दिलाने का आदेश दिया। आदेश के पालन में प्रशासन की मौजूदगी में मकान को ध्वस्त कर जमीन का कब्जा मूल स्वामी को सौंप दिया गया।


इलाके में चर्चा का विषय बना मामला, 10 साल बाद मिला न्याय

इस कार्रवाई के बाद पूरा मामला रायगढ़ क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। लगभग 10 साल लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद यह विवाद न्यायालय के फैसले से समाप्त हुआ, जिसे लोग कानूनी प्रक्रिया की बड़ी मिसाल मान रहे हैं।

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