
GST 2.0 दर कटौती से अ-पंजीकृत छोटे एवं दवा व्यापारियों को हो रहे घाटे पर राहत हेतु मंत्री को पत्र = अग्रवाल
:दुर्ग =GST 2.0 दर कटौती से अ-पंजीकृत छोटे व्यापारियों एवं दवा व्यापारियों को हो रहे घाटे पर राहत प्रदान करने हेतु छत्तीसगढ़ केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के महासचिव अविनाश अग्रवाल ने श्रीमती निर्मला सीतारमण वित्त मंत्री, भारत सरकार नई दिल्ली को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि छत्तीसगढ़ केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (CCDA) तथा अन्य व्यापारी संगठन, आम जनता की तरह GST 2.0 एवं 22 सितम्बर 2025 से लागू कम दरों का हम स्वागत करते हैं। निश्चित रूप से इससे उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिली है।
किन्तु इस निर्णय के परिणामस्वरूप एक बड़ा वर्ग पूरी तरह से अनदेखा रह गया है— वे छोटे व्यापारी जो GST में रजिस्टर्ड नहीं हैं।
विशेष रूप से छोटे दवा व्यापारी, जिन्होंने दवाइयाँ पहले ही ऊँची GST दर पर खरीदी थीं।
चूँकि वे रजिस्टर्ड नहीं हैं, इसलिए उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ नहीं मिल सकता।
अब जब दर घट गई है, उन्हें वही माल सस्ती दर पर बेचना पड़ रहा है, जिससे यह नुकसान सीधे उनकी जेब से कट रहा है।
मंत्रीगण इस कदम को सरकार की उपलब्धि बताकर जनता को अवगत करा रहे हैं, परन्तु छोटे व्यापारियों और दवा व्यापारियों के घाटे की भरपाई हेतु कोई ठोस नीति या मुआवज़ा अब तक घोषित नहीं किया गया है।हमारी माँगें:है कि सरकार स्पष्ट करे कि GST में रजिस्टर्ड न होने वाले छोटे व्यापारियों व दवा व्यापारियों के नुकसान की भरपाई कैसे होगी।
. ऐसे व्यापारियों के लिए विशेष राहत पैकेज या एकमुश्त मुआवज़ा योजना लाई जाए।
. यदि सीधा मुआवज़ा संभव नहीं है, तो कम से कम स्टॉक एडजस्टमेंट हेतु टैक्स-रिबेट/सब्सिडी जैसे व्यावहारिक उपाय किए जाएँ। इस संबंध में अग्रवाल ने आगे पत्र में लिखा की क्या सरकार गैर-रजिस्टर्ड छोटे व्यापारियों एवं दवा व्यापारियों को हुए इस घाटे की भरपाई करेगी?
या फिर यह माना जाए कि उनके नुकसान को भी सरकार अपनी उपलब्धि में गिन रही है?”
इस गंभीर मुद्दे पर शीघ्र संज्ञान लें और आवश्यक राहत की घोषणा करें, ताकि छोटे व्यापारियों व दवा व्यापारियों का अस्तित्व और विश्वास दोनों सुरक्षित रह सकें।
