
रायगढ़-उड़ीसा सीमा क्षेत्र में कोल ट्रांसपोर्ट को लेकर हुई हथियारबंद गैंगवार ने जिले की पूर्व पुलिस व्यवस्था की विफलता को साफ उजागर कर दिया है। यह मामला किसी तात्कालिक विवाद का नहीं बल्कि लंबे समय से चल रही गुंडा टैक्स की अवैध वसूली और पुलिस की लचर कार्यप्रणाली का परिणाम माना जा रहा है।
₹400से 500 प्रति वाहन की खुली वसूली या फिर कार्रवाई की कमी…?
सूत्रों से मिली जानकारी या फिर तमनार, रायगढ़ के बुद्धजीवी लोगों में हमेशा चर्चा रही है की बाहर से आने वाली ट्रांसपोर्ट गाड़ियों से ₹400से 500 प्रति वाहन की दर से महीनों तक खुलेआम वसूली होती रही, लेकिन न तो इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाए गए और न ही वसूली में लिप्त तत्वों पर कोई प्रभावी कार्रवाई हुई। इसी ने अपराधियों को इतना हौसला दिया कि मामला हथियारों के दम पर गैंगवार में तब्दील हो गया।हलाकि कई लोगों ऐसे भी है जो ट्रांसपोटरों की आपसी रजिश बताई जा रही है जो भी है अधिकारीयों की करवाई शून्य रही
100 से अधिक आरोपी,लेकिन गिरफ्तारी शून्य….?
तामनार उड़ीसा टपरंगा बॉर्डर पर हुई ट्रांसपोर्टों की खूनी घटना में 100 से अधिक लोग आरोपी या संदिग्ध के रूप में चिन्हित किए जा चुके हैं, बावजूद इसके एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। न गैंगवार में शामिल मुख्य चेहरे जेल पहुंचे और न ही वसूली गैंग पर कोई शिकंजा कसा गया।
पूर्व पुलिस की कमजोरी ने अपराधियों को बनाया ताकतवर
जानकारी के अनुसार, संगठन और डंपर पार्टी की आड़ लेकर कुछ गुंडा तत्वों ने बाहर से आने वाली कोल ट्रांसपोर्ट गाड़ियों से नियमित अवैध वसूली का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। उड़ीसा के ट्रांसपोर्टर्स ने मजबूरी में यह गुंडा टैक्स दिया, लेकिन विरोध पर मारपीट और हिंसा शुरू हो गई।
नए कप्तान पर टिकी सभी बुद्धजीवी की नजर…?
रायगढ़ में नए पुलिस अधीक्षक शशि मोहन की पदस्थापना हो चुकी है।और उनके दिशा निर्देश के बाद लगातार करवाई देखने को मिल रही है. और लगभग जिले के सभी थाना में करवाई पहले के अपेक्षा बढ़ी हुई है लेकिन अब पूरे जिले की निगाह इस बात पर है कि तामनार में ट्रांसपोटरों की खुनी घटना में शामिल आरोपियों के खिलाफ कब तक करवाई होंगी पुलिस कप्तान से रायगढ़ की जनता को काफी उमीदे है क्योंकि उस घटना ने रायगढ़ को सत्ते में डाल दिया था
जनता का सवाल कब होंगी कार्रवाई समयसीमा में हो…?
रायगढ़ में खुलेआम चल रही अवैध वसूली और गैंगवार के बावजूद अब तक गिरफ्तारी न होना आमजन के लिए चिंता का विषय है। सवाल उठता है कि पुलिस गिरफ्तारी और अवैध वसूली पर रोक के लिए समयसीमा कब तय करेगी, या जिले की कानून व्यवस्था पहले की तरह ही सवालों के घेरे में रहेगी।




