छत्तीसगढ़ी रैप की पहचान बने एप्पी राजा का निधन, संगीत जगत में शोक की लहर

‘टूरा भोको लोलो’ से घर-घर पहुंचे थे चेतन चांडक, लंबे समय से चल रहे थे बीमार

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रायपुर/भानुप्रतापपुर। छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय रैपर और सिंगर एप्पी राजा उर्फ चेतन चांडक (32) का निधन हो गया। वे पिछले कई महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और रायपुर के एम्स अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन की खबर सामने आते ही छत्तीसगढ़ी संगीत जगत और लाखों प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई।


छह महीने से चल रहा था इलाज

जानकारी के अनुसार करीब छह महीने पहले एप्पी राजा की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एक ऑपरेशन के बाद उनके शरीर में खून की कमी हो गई थी। लगातार हीमोग्लोबिन घटने के कारण उन्हें कमजोरी, चक्कर और सांस लेने में परेशानी हो रही थी।

डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी था और समय-समय पर रक्त भी चढ़ाया जा रहा था, लेकिन आखिरकार वे जिंदगी की जंग हार गए।


बस्तर के छोटे कस्बे से शुरू हुआ सफर

कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर निवासी एप्पी राजा का वास्तविक नाम चेतन चांडक था। बेहद साधारण परिवार से आने वाले चेतन ने संघर्षों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।

वे महज 13-14 साल की उम्र से रैप गीत लिखने लगे थे। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें कुछ समय गुजरात के सूरत में नौकरी भी करनी पड़ी, लेकिन संगीत के प्रति जुनून उन्हें फिर अपने सपनों की ओर खींच लाया।


‘टूरा भोको लोलो’ ने दिलाई पहचान

एप्पी राजा को सबसे बड़ी पहचान उनके सुपरहिट रैप सॉन्ग ‘टूरा भोको लोलो’ से मिली। यह गीत रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ।

इसके बाद उन्होंने लगातार एक से बढ़कर एक गीत दिए और छत्तीसगढ़ी रैप को नई पहचान दिलाई।

उनके चर्चित गीतों में—

  • टूरा भोको लोलो
  • आ जा रे टुरी तोला रसगुल्ला खवाहु
  • छत्तीसगढ़ एंथम
  • चो चो हस

जैसे कई लोकप्रिय गाने शामिल हैं।


एपीजे अब्दुल कलाम और भगत सिंह पर भी बनाए रैप

एप्पी राजा सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को समर्पित रैप सॉन्ग और शहीद भगत सिंह पर भी गीत तैयार किए, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा।

उनके गीतों में सामाजिक संदेश और युवाओं को प्रेरित करने वाले विषय भी देखने को मिले।


पंजाब से मिला था पहला बड़ा मौका

साल 2015 में पंजाब की एक म्यूजिक कंपनी ने उनका रैप सुनकर उन्हें रिकॉर्डिंग का मौका दिया। यहीं से उनके करियर को नई उड़ान मिली।

पंजाब में रहते हुए उन्होंने संघर्ष और मेहनत के दम पर अपने संगीत को नई पहचान दी। शुरुआती दिनों में आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने स्टूडियो में रात-रात भर मेहनत कर अपने गीत तैयार किए।


सोशल मीडिया पर थे लाखों प्रशंसक

एप्पी राजा सोशल मीडिया पर भी बेहद लोकप्रिय थे।

  • इंस्टाग्राम पर लगभग 1.98 लाख फॉलोअर्स
  • यूट्यूब पर करीब 5.95 लाख सब्सक्राइबर्स
  • यूट्यूब चैनल पर 13 करोड़ 24 लाख से अधिक व्यूज

उनकी लोकप्रियता केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं थी, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले छत्तीसगढ़ियों के बीच भी उनके गीत खूब पसंद किए जाते थे।


संघर्षों से भरी रही जिंदगी

जब एप्पी 11वीं कक्षा में थे, तब उनके पिता को हार्ट अटैक आया और परिवार आर्थिक संकट में घिर गया। मां ने सिलाई का काम शुरू किया, जबकि एप्पी परिवार की मदद के लिए सूरत जाकर नौकरी करने लगे।

हालांकि उनका मन संगीत में ही बसता था। परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने रैप संगीत की दुनिया में अपना मुकाम बनाया।


संगीत जगत ने खोई युवा आवाज

एप्पी राजा के निधन के बाद सोशल मीडिया पर कलाकार, प्रशंसक और संगीत प्रेमी उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ी संगीत जगत ने एक ऐसी युवा आवाज खो दी है जिसने अपने दम पर स्थानीय भाषा और संस्कृति को रैप के माध्यम से नई पहचान दिलाई।

उनका जाना छत्तीसगढ़ी संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

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