दुष्कर्म के आरोपी को 10 साल की सजा 5 साल के बेटे की गवाही बनी अहम सबूत,अपर सत्र न्यायाधीश भदौरिया का फैसला
Session Case No. 128/2025
न्यायालय – अपर सत्र न्यायाधीश FTC, अंबिकापुर (पीठासीन – श्री के.पी.सिंह भदौरिया)
अंबिकापुर । सरगुजा जिले के लखनपुर थाना क्षेत्र में हुए दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी गोंहदुल राम कोरवा (25 वर्ष) को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उसे भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। धारा 351(3) के आरोप से आरोपी को संदेह 3333 लाभ देते हुए बरी किया गया है।
क्या था मामला
अभियोजन के अनुसार घटना 24.04.2025 को दोपहर बाद की है। उस दिन पीड़िता के पति समूह की मीटिंग में बाहर गये थे। घर पर पीड़िता के दो छोटे बच्चे मौजूद थे।
आरोपी रिश्ते में पीड़िता के जेठ का दामाद लगता है। वह उसी दिन अपने बड़े भाई और उसके बेटे के साथ दोपहर करीब 2 बजे पीड़िता के घर आया था। सभी ने साथ में खाना खाया, जिसके बाद बेटा-बहू और उसका भाई घर से चले गये और आरोपी वहीं रुक गया।
इसी दौरान जब पीड़िता घर के काम से बाहर से लौटी, तो आरोपी ने घर में मौजूद दो छोटे बच्चों की उपस्थिति में ही उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।
*5 वर्षीय पुत्र बना चक्षुदर्शी साक्षी*
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण गवाही पीड़िता के 5 वर्षीय पुत्र की रही। बच्चे ने न्यायालय में बताया कि आरोपी उसका जीजा है और उसने अपनी मां के साथ गलत काम करते हुए देखा था। घर के बाहर बच्चों के चिल्लाने पर और बाद में पिता के लौटने पर बच्चों ने ही पिता को पूरी घटना बताई।
पीड़िता के पति ने भी न्यायालय में बताया कि घर लौटने पर उसके पुत्र ने उसे घटना के बारे में बताया, तब उसकी पत्नी ने भी रोते हुए आपबीती बताई। उस समय आरोपी घर में ही मौजूद था और कह रहा था कि उसने कुछ नहीं किया। विवाद होने पर आरोपी ने पति को तीर-धनुष लाकर जान से मारने की धमकी दी और घर की ओर भाग गया।
डर के कारण 20 दिन बाद FIR, पहले पंचायत में प्रयास
न्यायालय के फैसले में यह भी उल्लेख है कि घटना के बाद आरोपी रात में तीर-धनुष लेकर पीड़िता के घर के आसपास घूमता रहा, जिससे डरा-सहमा परिवार अपने बच्चों को पड़ोसी के घर सुलाने लगा।
दूसरे दिन पीड़िता और उसका पति आरोपी के घर समझौता करने गये, वहां उसके बड़े भाई ने बैठक करने की बात कही। इसके बाद वे गांव के सरपंच और पटेल के पास भी गये, जिन्होंने कहा कि यह मामला उनके स्तर का नहीं है, आप थाना जाओ। इसके बाद ही करीब 20 दिन बाद 14.05.2025 को थाना लखनपुर में FIR दर्ज कराई गई। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 183 BNSS का कथन भी कराया।
*बचाव पक्ष का तर्क और न्यायालय का निष्कर्ष*
बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि पीड़िता और आरोपी के बीच शराब पीकर गाली-गलौज का विवाद हुआ था, जिससे नाराज होकर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पीड़िता की CD बयान में बलात्कार का उल्लेख नहीं था।
न्यायालय ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि –
1. दुष्कर्म जैसे मामले में पीड़िता का बयान सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है, जो उपहत साक्षी के समान है। 2. पुलिस कथन में आये मामूली विरोधाभास साबित नहीं हुए ! विवेचक ASI निर्मला कश्यप ने विवेचना को प्रमाणित किया!
3. पीड़िता , उसके पति और चक्षुदर्शी 5 वर्षीय बालक के कथन एक-दूसरे का समर्थन करते हैं और संदेह से परे अपराध को प्रमाणित करते हैं।
न्यायालय ने माना कि सामान्यतः ऐसा अपराध एकांत में किया जाता है, परंतु इस मामले में आरोपी ने बच्चों की मौजूदगी में ही यह कृत्य किया है, जिसकी पुष्टि चक्षुदर्शी बालक ने की है।
पीड़िता के पुनर्वास का आदेश
न्यायालय ने आरोपी को 15.05.2025 से जेल में बिताई गई अवधि को मुजरा करने का आदेश दिया है और साथ ही धारा 396 BNSS के तहत छत्तीसगढ़ पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना 2018 के तहत पीड़िता के पुनर्वास के लिए प्रतिकर दिये जाने की अनुशंसा की है। इसके लिए निर्णय की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अंबिकापुर को भेजी गई है। मामले में अभियोजन की ओर से पैरवी अभिषेक कश्यप APP एवं J R विशाल ने की थी !
