
रायपुरः छत्तीसगढ़ की सियासत इन दिनों केंद्र बनाम राज्य के इर्द गिर्द घूम रही है। मुद्दे अलग-अलग लेकिन वार-पलटवार का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इस बार अखाड़े में ज्योतिरादित्य सिंधिया और सीएम भूपेश बघेल आमने-सामने हैं। जंग की शुरुआत केंद्रीय मंत्री की चुनौती से हुई, जो आइडियोलॉजी और दलबदलू तक पहुंच गई। सिंधिया वर्सेस भूपेश की लड़ाई और इस पर जारी बयानबाजी के सियासी मायने क्या है?
केंद्र से छत्तीसगढ़ के हिस्से की बकाया राशि को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आमने-सामने हैं। फंड को लेकर शुरू हुई लड़ाई आइडियोलॉजी तक पहुंच गई है। दरअसल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार मोदी सरकार पर छत्तीसगढ़ की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं। आकांक्षी जिलों का दौरा करने मंगलवार को राजनांदगांव पहुंचे सिंधिया ने मुख्यमंत्री के आरोपों का जवाब देते हुए उन्हें बहस तक की चुनौती दे दी।
सिधिया ने कहा कि पिछले तीन साल में केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ को राशि, अनुदान और GST के भाग रूप में 1 लाख करोड़ रु दिए हैं.. इस मुद्दे पर वो भूपेश बघेल से भी बहस को तैयार हैं। सिंधिया की चुनौती पर मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि मैं दलबदलुओं को जवाब देना उचित नहीं समझता। उन्हें अपने पुराने और नए बयान की तुलना करने की नसीहत दी और कहा कि जिनकी कोई ऑडियोलॉजी नहीं है, जो दल बदलते हैं ऐसे लोगों को क्या जवाब देना।
मुख्यमंत्री इससे पहले बीजेपी सांसदों को भी कठघरे में खड़ा करते आरोप लगा चुके हैं कि पीएम मोदी के सामने इनका मुंह नहीं खुलता। जिसे लेकर बीजेपी और कांग्रेस नेता आंकड़ों के जरिए एक दूसरे की घेराबंदी कर रहे हैं। बहरहाल सिंधिया के बहाने सीएम ने बीजेपी पर निशाना साधा तो छत्तीसगढ़ बीजेपी भी एक्शन मोड में आई और कहा कि मुख्यमंत्री बहस से भागने के लिए बहानेबाजी कर रहे हैं।
फंड को लेकर केंद्र बनाम राज्य के बीच लड़ाई हर दिन आक्रामक होती जा रही है। एक और बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री मोर्चा संभाले हुए हैं। तो दूसरी तरफ सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेता। दोनों के अपने आंकड़े हैं। अपने दावे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि आर-पार की इस लडाई में कौन बीस साबित होता है?



