विकास के श्रेय पर सियासी संग्राम, सांसद के बयान पर विधायक का पलटवार, विधायक बोले – “जनता के संघर्ष से विकास तक, हर मोर्चे पर साथ खड़ा हूं”

कुड़े केला: – रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया के हालिया बयान के बाद धरमजयगढ़ की राजनीति में विकास कार्यों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। सांसद द्वारा विधायक लालजीत सिंह राठिया के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों को लेकर टिप्पणी किए जाने के बाद विधायक ने अपने कार्यकाल के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए सांसद के बयान पर पलटवार किया है।


सांसद राधेश्याम राठिया ने अपने बयान में कहा था कि तीन बार विधायक चुने जाने के बावजूद धरमजयगढ़ क्षेत्र में अपेक्षित विकास कार्य दिखाई नहीं देते। उन्होंने पेट्रोल पंप, मंदिर और तालाब जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए विधायक के विकास कार्यों पर अपनी बात रखी थी। सांसद ने विधायक को उनके गृह क्षेत्र में सर्वसुविधायुक्त गांव दिखाने की चुनौती भी दी थी। साथ ही उनका कहना था कि भाजपा सरकार द्वारा कराए गए कार्यों का श्रेय विधायक द्वारा लिया जा रहा है।
सांसद के इन बयानों पर विधायक लालजीत सिंह राठिया ने क्षेत्र में हुए विभिन्न विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विधायक मद से बनी सड़कें, चौक-चौराहों पर निर्मित मंच, विभिन्न भवन और पुल क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को सामने रखते हैं।


विधायक ने धरमजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र में मालपानी, साजापाली, कुदमुरा, इमलीटिकरा, बरतापाली, कुडेकेला, बनहर, महाराजगंज, बोकरामुड़ा और डोंगाघाट सहित अन्य स्थानों पर निर्मित पुलों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, मांड नदी और विभिन्न नालों पर बने इन पुलों से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम हुआ तथा गांवों के बीच संपर्क मजबूत हुआ।
हाटी-धरमजयगढ़ सड़क और मुनुन्द गांव का मुद्दा भी उठाया
विधायक ने सड़क निर्माण को लेकर भी सांसद के बयान पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हाटी से धरमजयगढ़ तक की सड़क 15 वर्षों में भी डबल लेन नहीं हो सकी, जबकि उनके अनुसार इस सड़क का निर्माण कांग्रेस शासनकाल में हुआ था। विधायक ने सड़क के उन्नयन और डबल लेन किए जाने को क्षेत्र की महत्वपूर्ण जरूरत बताते हुए इस मुद्दे को विकास के दावों के बीच रखा।


इसी क्रम में विधायक ने मुनुन्द गांव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस मुनुन्द गांव में मन की बात कार्यक्रम सुना गया, वहां 15 वर्षों तक भाजपा की सरकार रहने के बावजूद मुख्य मार्ग से गांव तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका। विधायक के अनुसार, इस सड़क की स्वीकृति कांग्रेस कार्यकाल में मिली थी। यह विधायक द्वारा विकास कार्यों और उनके समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर रखा गया उनका पक्ष है।


विधायक ने राठिया भवन का उल्लेख करते हुए सांसद पर तंज कसा और कहा कि धरमजयगढ़ में जिस भवन में सांसद बैठकें करते हैं, उसका निर्माण भी उनके कार्यकाल में कराया गया था। उनके अनुसार, क्षेत्र में हुए विकास कार्य जमीन पर मौजूद हैं और जनता उनका आकलन स्वयं कर सकती है।


जनता के संघर्षों में साथ खड़े रहने का भी किया उल्लेख


विधायक ने कहा कि जनप्रतिनिधि की भूमिका केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं होती, बल्कि जनता के संघर्ष और स्थानीय समस्याओं के समय उसके साथ खड़ा होना भी जरूरी है। उन्होंने तमनार क्षेत्र से जुड़े जनसरोकार के मुद्दों, पेड़ कटाई, आदिवासी समुदाय से जुड़े मामलों और जिले में हुई तोड़फोड़ की कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विषयों पर भी उन्होंने जनता के साथ खड़े होकर उनकी आवाज उठाने का प्रयास किया है।


पुरुंगा कोल ब्लॉक में प्रस्तावित जनसुनवाई के विरोध का उल्लेख करते हुए विधायक ने कहा कि पुरुंगा, तेंदुमुड़ी और साम्हरसिंघा क्षेत्र के ग्रामीण उस दौरान जनप्रतिनिधियों से समर्थन की अपेक्षा कर रहे थे। विधायक के अनुसार, वे जनता के साथ खड़े रहे, जबकि सांसद की मौजूदगी वहां नहीं रही। यह विधायक द्वारा सांसद की भूमिका को लेकर व्यक्त किया गया उनका राजनीतिक मत है।


विधायक लालजीत सिंह राठिया ने कहा कि वे “जनता जनार्दन की सेवा में दिन-रात तत्पर हैं और इसी का प्रतिफल है कि क्षेत्र की जनता ने उन्हें लगातार तीसरी बार सेवा करने का अवसर दिया।” उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं को समय-समय पर विधानसभा में उठाया गया है और उनके समाधान के लिए प्रयास किए गए हैं।


उन्होंने सांसद से भी रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं और जनहित के विषयों को संसद में उठाने तथा उनके समाधान के लिए की गई पहल का विवरण सामने रखने की बात कही।
सांसद और विधायक के बयानों के बाद धरमजयगढ़ में विकास कार्यों, सड़क और पुल निर्माण, जनहित के मुद्दों, जनता के संघर्षों और विकास के श्रेय को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। दोनों नेताओं ने अपने-अपने दृष्टिकोण से क्षेत्र के विकास और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर अपनी बातें रखी हैं। अब यह राजनीतिक बहस क्षेत्र में विकास कार्यों और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित होती दिखाई दे रही है।

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