दिल दहला देने वाली और सोचने वाली घटना इस पर गौर करें आज क्या हो रहा है
_*कार्यालय प्रतिनिधि *
एक बहुत मार्मिक खबर चल रहा है सोशल मीडिया पे की मुंबई में बड़े कपड़ा व्यापारी रहे शिवचरण रामरत्न गुप्ता की हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में मौत हो गई। आश्रम से इसकी सूचना उनकी तीनों बेटियों को दी गई, लेकिन तीनों में से कोई भी बेटी नहीं आई। बेटियों ने ऑनलाइन 5100 रुपए भेजकर अंतिम संस्कार सोनीपत में ही कराने को कहा। वीडियो कॉल के जरिए बेटी ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया देखा।*
यह घटना वाकई दिल दहला देने वाली और सोचने पर मजबूर करने वाली है।
शिवचरण ने जीवन भर अपनी बेटियों के लिए सब कुछ किया। बुढ़ापे में वे सिर्फ एक बार उनका चेहरा देखना चाहते होंगे। अंतिम सांस तक शायद इंतजार करते रहे होंगे। लेकिन विदाई भी स्क्रीन पर हो गई।यह सिर्फ एक बाप की कहानी नहीं है। यह उन हजारों बुजुर्गों की कहानी है जो आज के भागते-दौड़ते भारत में अकेले रह गए हैं। जहां सफलता, करियर और दूरी ने रिश्तों की जगह ले ली है। जहां माता-पिता बच्चों को बड़े सपनों के साथ उड़ा देते हैं, और खुद जमीन पर अकेले रह जाते हैं।शिवचरण ने जाते-जाते भी अपनी आंखें दान कर दीं। दो जरूरतमंदों को रोशनी दे गए। उनकी सोच इतनी ऊंची थी। लेकिन उनकी अपनी आंखों में शायद आखिरी बार सिर्फ आश्रम की छत और फोन की स्क्रीन ही थी।हम कितने आधुनिक हो गए हैं कि पिता की अंतिम विदाई भी वीडियो कॉल पर देख लेते हैं? कितने व्यस्त हो गए हैं कि 5100 रुपये भेजकर कर्तव्य पूरा मान लेते हैं?यह घटना हमें आईना दिखाती है। रिश्ते सिर्फ जन्मदिन की शुभकामनाओं और फेस्टिवल की फोटो से नहीं चलते। वे उपस्थिति, स्पर्श और समय से चलते हैं। बुजुर्गों को सिर्फ पैसे नहीं, अपनापन चाहिए।शिवचरण रामरत्न गुप्ता अब नहीं रहे। लेकिन उनकी खामोश विदाई हमें बार-बार याद दिलाएगी—किसी बाप को कभी इतना अकेला मत छोड़ना कि उसकी अंतिम यात्रा भी स्क्रीन पर हो जाए, क्योंकि एक दिन हम भी उन्हीं की जगह होंगे।
समाज को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए।


