मनाया गया एलॅन्स पब्लिक स्कूल में हिंदी दिवस

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दिनेश दुबे 9425523689
*एलॅन्स पब्लिक स्कूल में हिंदी दिवस मनाया गया*
बेमेतरा 14/09/2023:- एलॅन्स पब्लिक स्कूल में आज हिन्दी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ हिंदी उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर एवं उन्हें माल्यार्पण कर प्राचार्य, डॉ. सत्यजीत होता, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा सरस्वती वंदना के साथ किया गया।
*लता मंगेशकर क्लब की ओर से “हिन्दी हमारी शान है” नामक समूह गीत प्रस्तुत किया गया। कक्षा-आठवीं की छात्रा जिया टंडन ने हिंदी भाषा के महत्व पर विचार प्रकट किए। कक्षा-सातवीं और नौवीं के छात्रों द्वारा “हिंदी बीमार है” एक हिंदी नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया गया। नटराज क्लब द्वारा समूह नृत्य प्रस्तुत किया गया। मुंशी प्रेमचंद क्लब से कक्षा-दूसरी भूमिका और प्रथमेश, कक्षा-तीसरी समरेश मोहंती, कक्षा-पाँचवी की पूर्वी सोनी और सोहम काले तथा कक्षा नवमी के तेजस्वी पटेल द्वारा हिंदी कविता पाठ किया गया। पूर्वी सोनी ने कबीर के दोहे सुनाये।
प्राचार्य डॉ. सत्यजीत होता ने कहा कि किसी राष्ट्र में राष्ट्रभाषा का सबसे अधिक महत्व होता है। प्रत्येक मनुष्य अपनी भावनाओं को किसी न किसी भाषा के माध्यम से ही व्यक्त करता है। भाषा साहित्य, कला, विज्ञान और दर्शन का आधार है। शिक्षक की कोई जाति नहीं होती। किसी भी देश के निवासियों में राष्ट्रीय एकता एवं राष्ट्रीय एकता के विकास के लिए एक राष्ट्रभाषा आवश्यक है। सबसे पहले, महात्मा गांधी ने 1918 में हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने का प्रस्ताव रखा था। हिंदी भाषा संस्कृत भाषा का वंशज है। जो व्यक्ति अपनी दादी से प्यार नहीं करता, वह अपनी पत्नी और बहन से प्यार नहीं कर सकता। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार, देश की आधिकारिक भाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी। उन्होंने कहा कि यह दुख की बात है कि एक हिंदी भाषी व्यक्ति को दूसरे हिंदी भाषी व्यक्ति को यह भाषा बोलने के लिए कहना पड़ता है। हिंदी हमारे देश के नवजागरण की भाषा और स्वतंत्रता संग्राम की भाषा है। हिंदी हमारी विरासत और सांस्कृतिक विरासत की भाषा है। यह हिंदुस्तानी नागरिकों के सशक्तिकरण की भाषा है। यह एक ऐसी भाषा है जो हमें औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने और हमारी मानसिकता में हिंदुस्तानी या भारतीय का जामा पहनाने में मदद करेगी। मनुष्य के मानसिक एवं बौद्धिक विकास के लिए भी एक राष्ट्रभाषा आवश्यक है। कोई भी व्यक्ति चाहे कितनी भी भाषाएं सीख ले, उसे भावनाओं को व्यक्त करने के लिए मातृभाषा का ही सहारा लेना पड़ता है। इससे मानसिक संतुष्टि अधिक मिलती है। उन्होंने कहा कि हिन्दी हमारी राजभाषा है जिसका प्रयोग सरकारी कामकाज में किया जाता है। आधुनिक युग में हम हिंदुस्तान की परंपराओं को नजर अंदाज कर रहे हैं। जिस प्रकार माँ के ममत्व का सर्वाधिक महत्व है। उसी प्रकार राष्ट्रीय विकास के लिए हिन्दी भाषा आवश्यक है। जिस प्रकार माँ का ममत्व बच्चे को पोषण देता है, उसी प्रकार मातृभाषा नागरिकों में राष्ट्रीयता की भावना पैदा करती है। उन्होंने हिन्दी भाषा की सरलता एवं व्याकरण की प्रशंसा की। उन्होंने राष्ट्रीय विकास के लिए हिंदी को अपनाने पर जोर दिया।
*हिन्दी विभाग की श्रीमती पुष्पलता पटले ने हिन्दी भाषा की महिमा के बारे में हिन्दी कविता का पाठ किया। सुश्री ज्योति ज्वाला ने हिन्दी साहित्य के विकास के बारे में बताया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती पुष्पलता पटले द्वारा किया गया।
*कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और जय हिंदी और जय हिंदुस्तान के नारे के साथ हुआ।
उक्त कार्यक्रम मे स्कूल प्रबंधन के अध्यक्ष कमलजीत अरोरा-अध्यक्ष, पुष्कल अरोरा-निदेशक, सुनील शर्मा-निदेशक, शिक्षक और छात्र उपस्थित थे।

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