
कान पर जूं न रेंगने की हठ, कलेक्टर के फरमान को ठेंगा दिखा बोर खनन
रायगढ़ : जल संकट से जूझ रहे रायगढ़ में कलेक्टर के बोर खनन पर रोक के आदेश को सिरे से नजरअंदाज करते हुए अवैध खनन का धंधा बेखौफ फल-फूल रहा है। ताजा वाकया सामने आया, जहाँ लक्ष्मी बोरवेल की दो गाड़ियाँ रात के अंधेरे में खनन में जुटी थीं।
मंगलवार रात मीडिया को गुप्त सूचना मिली कि प्रतिबंध की धज्जियाँ उड़ाते हुए खनन का खेल चल रहा है। मौके पर पहुँची मीडिया टीम ने देखा कि दो गाड़ियाँ बोर खनन में व्यस्त थीं। कैमरा देखते ही कर्मचारियों के होश उड़ गए। कर्मचारी आनंद फांद ने फौरन मालिक को फोन घुमाया। इसके बाद हड़बड़ाहट में खनन रोककर पाइप गाड़ियों में ठूंसे जाने लगे, और कर्मचारी भागने की जुगत में जुट गए।
मीडिया के सवालों पर एक कर्मचारी ने बेबाकी से कहा, “मालिक का हुक्म, हम बस अमल करते हैं। खनन के लिए भेजा, तो वही कर रहे हैं।” जब कागजात या आदेश की बात आई, तो उसने हाथ खड़े कर दिए, बोला, “हमें क्या पता, कोई दस्तावेज नहीं मिला। बॉस ने रात में काम शुरू करने को कहा था।”
खनन करवाने वाले शख्स ने भी पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उसे कलेक्टर के प्रतिबंध की खबर ही नहीं थी। उसने बताया, “खनन करने वाले ने मुझे कुछ नहीं बताया। कहा कि टाइम मिले, तो करेंगे। रात में आए और शुरू हो गए।”
प्रशासन के सख्त आदेशों को इस तरह ठेंगा दिखाने का यह मामला जिले में जल संकट के बीच गंभीर चिंता पैदा करता है। सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस बेलगाम खनन पर लगाम कस पाएगा, या यह खेल यूं ही अनवरत चलता रहेगा? क्योंकि घटना की जानकारी नजदीकी तहसीलदार को भी नहीं? जिसके बावजूद कोई एक्शन नहीं? आखिर अधिकारी कब तक रहेंगे मौन?




