बेलेरिया एनीकट पर बढ़ा विवाद, ओडिशा के गांवों ने लगाया जल संकट का आरोप
रायगढ़।
मामले को लेकर महानदी बचाओ जीविका बचाओ अभियान से जुड़े पदाधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने बेलेरिया पहुंचकर एनीकट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि कुर नाला और छोटाकेलो नदी के जल प्रवाह पर असर पड़ने से ओडिशा के कई गांवों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
अभियान से जुड़े पूर्व केंद्रीय मंत्री ब्रजकिशोर त्रिपाठी ने कहा कि झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर ब्लॉक के कई गांव इस नदी पर निर्भर हैं। उनका आरोप है कि एनीकट निर्माण के बाद प्राकृतिक जल प्रवाह में कमी आई है, जिससे ग्रामीणों को पेयजल, घरेलू उपयोग और पशुओं के लिए पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा सीमा से लगे गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से चर्चा भी की। ग्रामीणों ने बताया कि नदी का जलस्तर पहले की तुलना में कम हो गया है, जिससे दैनिक जरूरतों के लिए पानी जुटाना मुश्किल हो रहा है।
वहीं, बेलेरिया के पूर्व सरपंच इंद्र विलास पंडा ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि एनीकट का निर्माण क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना से लगभग 250 एकड़ कृषि भूमि को लाभ मिलेगा और अतिरिक्त पानी का प्रवाह आगे भी जारी है।
विवाद के बीच महानदी बचाओ जीविका बचाओ अभियान के संयोजक रघुवीर प्रधान ने आशंका जताई है कि भविष्य में क्षेत्र में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं को पानी उपलब्ध कराने के लिए भी इस तरह की जल संरचनाओं का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में किसी सरकारी एजेंसी या उद्योग समूह की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इससे पहले एनीकट की निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। कुछ ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में तकनीकी खामियों और पानी रिसाव की शिकायत प्रशासन से की थी। मामले को लेकर ग्रामीणों ने जनदर्शन में भी आवेदन दिया था।
जल संरक्षण, सिंचाई और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर महानदी बेसिन में जल प्रबंधन और अंतर्राज्यीय जल बंटवारे के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से पूरे मामले का तकनीकी परीक्षण कर निष्पक्ष समाधान निकालने की मांग की है।



