
नई नीति और कटौती का कारण
केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत ने बांग्लादेश को दी जाने वाली विदेशी विकास सहायता में 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये करने का फैसला किया। आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार, पिछले वर्ष केवल 34.48 करोड़ रुपये ही वास्तविक रूप से खर्च किए गए थे। कटौती के पीछे बढ़ते द्विपक्षीय तनाव और पड़ोसी देश में बढ़ती हिंदू विरोधी घटनाओं को कारण बताया जा रहा है।
भूटान को बढ़ाया समर्थन
इस दौरान, भूटान को भारत की सहायता में लगभग 6% वृद्धि कर 2,289 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह जलविद्युत और अवसंरचना परियोजनाओं के निरंतर समर्थन को दर्शाता है।
क्षेत्रीय और रणनीतिक महत्व
2024 में भारत ने चाबहार (ईरान) में शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के 10 वर्षीय संचालन समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अमेरिका की प्रतिबंध नीति और ईरान के साथ बढ़ते दबाव के कारण इस परियोजना और भारत की मध्य एशिया तथा अफगानिस्तान तक पहुँच में अनिश्चितता बढ़ गई है। इस परिस्थिति ने बांग्लादेश को दी जाने वाली सहायता पर प्रभाव डाला है।
आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत की विदेश नीति में सशर्त सहायता नीति और पड़ोसी देशों में सुरक्षा, मानवाधिकार व निवेश संबंधी दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। जबकि बांग्लादेश के लिए कटौती है, भूटान और अन्य मित्र देशों को बढ़ाया गया समर्थन भारत की क्षेत्रीय रणनीति और सहयोगी राष्ट्रों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।




