पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी राज्यों को चेतावनी


नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विशेष जांच रिपोर्ट (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को कड़ा संदेश दिया है कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जहां सुधार की जरूरत होगी, वहां आवश्यक आदेश दिए जाएंगे, लेकिन प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सभी राज्यों को यह बात समझनी चाहिए कि SIR एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय इसकी निगरानी करेगा और किसी भी तरह की रुकावट को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

SIR डेटा की समय सीमा एक सप्ताह बढ़ी

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में दस्तावेज़ सत्यापन और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की समय सीमा 14 फरवरी से बढ़ाकर 21 फरवरी कर दी है। यह राहत चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद दी गई।

सीजेआई ने टिप्पणी की कि यदि अधिकारियों की सूची 5 फरवरी तक प्रस्तुत कर दी गई होती, तो भारत निर्वाचन आयोग (ECI) अब तक इस पर निर्णय ले चुका होता।

ERO नियुक्ति पर चुनाव आयोग की आपत्ति

चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ERO) की नियुक्ति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ERO अर्ध-न्यायिक कार्य करते हैं, इसलिए उनके पास पर्याप्त न्यायिक अनुभव होना आवश्यक है।

नायडू ने बताया कि ईसीआई ने लगभग 300 ग्रुप-बी अधिकारियों की मांग की थी, लेकिन केवल 64 अधिकारी ही आवश्यक अनुभव वाले पाए गए। शेष नियुक्तियां वेतन समानता के आधार पर की गईं। उन्होंने तर्क दिया कि इंजीनियर जैसे अधिकारी SIR के तहत लिए जाने वाले न्यायिक निर्णयों को संभालने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, क्योंकि इन फैसलों को अपीलीय मंचों पर चुनौती दी जा सकती है।

निर्धारित समय पर ही चलेगी पुनरीक्षण प्रक्रिया

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारी की पीठ ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार ही आगे बढ़ना चाहिए।


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