
नई दिल्ली। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक अर्मिनी की भारत यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक राजनीति का नया रणनीतिक केंद्र बनता जा रहा है। इस पृष्ठभूमि में भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपने समुद्री पड़ोसियों के साथ संबंधों को केवल कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें सामरिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी में बदलेगा। यही वजह है कि यह यात्रा भारत–सेशेल्स संबंधों के लिए एक नए चरण की शुरुआत मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति अर्मिनी की उपस्थिति में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान सबसे अहम घोषणा रही सेशेल्स के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर की विशेष आर्थिक सहायता योजना।
ठोस परियोजनाओं पर केंद्रित सहायता
इस आर्थिक पैकेज का उपयोग सामाजिक आवास, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, कौशल एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं, रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा जैसी ठोस परियोजनाओं में किया जाएगा। यह संकेत देता है कि भारत की रणनीति अब केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले विकास कार्यों पर केंद्रित है।
ऊर्जा, जलवायु और आपदा प्रबंधन में सहयोग
दोनों देशों ने स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन से निपटने, और आपदा-सहिष्णु अवसंरचना के निर्माण पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई है। इसके तहत स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन, बिजली से चलने वाले वाहन, और टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
जन-संपर्क और युवा सहयोग पर जोर
भारत और सेशेल्स ने यह भी तय किया कि पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति और खेल के माध्यम से दोनों देशों के लोगों को और करीब लाया जाएगा। विशेष रूप से युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है, ताकि भविष्य की साझेदारी को मजबूत आधार मिल सके।
रणनीतिक संदेश
इस यात्रा के जरिए भारत ने साफ कर दिया है कि हिंद महासागर क्षेत्र में वह विश्वसनीय साझेदार की भूमिका निभाने के लिए तैयार है—ऐसा साझेदार जो सुरक्षा, विकास और जलवायु जैसे साझा वैश्विक मुद्दों पर अपने सहयोगियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहे।




