हैदराबाद में भारत-ब्राजील ट्रेड डील पर हस्ताक्षर, रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा

हैदराबाद, 21 फरवरी 2026: भारत और ब्राजील के बीच शनिवार को अहम ट्रेड डील पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान भी किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति लूला और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और ब्राजील के रिश्तों को उनके दूरदर्शी नेतृत्व से निरंतर मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि यह दौरा ऐतिहासिक एआई समिट की शोभा बढ़ाने के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देगा।

भारत-ब्राजील ट्रेड डील की 5 बड़ी बातें

  1. ब्राजील, लैटिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर
    पीएम मोदी ने कहा कि ब्राजील लैटिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देश अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर से आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  2. इंडिया-मर्कोसुर ट्रेड एग्रीमेंट का विस्तार
    भारत और Mercosur के बीच ट्रेड एग्रीमेंट के विस्तार से आर्थिक सहयोग और मजबूत होगा।
  3. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर फोकस
    दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटर, सेमीकंडक्टर और ब्लॉकचेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। साथ ही ब्राजील में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने पर काम चल रहा है।
  4. बिजनेस वीजा अवधि में विस्तार
    ब्राजील ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए बिजनेस वीजा की अवधि बढ़ाकर 10 वर्ष कर दी है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
  5. ग्लोबल साउथ के लिए साझेदारी
    दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि टेक्नोलॉजी समावेशी होनी चाहिए और साझा प्रगति के लिए एक सेतु का काम करे।

राष्ट्रपति लूला का बयान

राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना “प्रिय मित्र” बताते हुए कहा कि भारत और ब्राजील केवल ग्लोबल साउथ की दो बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियां ही नहीं, बल्कि एक डिजिटल सुपरपावर और एक नवीकरणीय ऊर्जा सुपरपावर भी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश सांस्कृतिक विविधता के केंद्र हैं और बहुपक्षवाद तथा वैश्विक शांति के समर्थन में एकजुट हैं।

समझौते को भारत-ब्राजील संबंधों में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई दे सकता है।

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