रेत मामले ने पकड़ा तूल,अब अनिशिचत काल तक ढुलाई बन्द करने पर अड़ा ट्रेक्टर संघ


जशपुरनगर। शहर में अब अनिश्चितकाल तक रेत की ढुलाई नहीं होगी। रविवार को शहर के रणजीता स्टेडियम में आयोजित ट्रक और ट्रेक्टर संघ की बैठक के बाद,इसकी घोषणा की गई। जानकारी देते हुए,संघ के अध्यक्ष सतीश गोस्वामी ने बताया कि बैठक में संघ के सभी सदस्यों ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि जिला प्रशासन द्वारा अवैध परिवहन के मामले में की जा रही कार्रवाई में भेदभाव किया जा रहा है। उन्होनें बताया कि रसूखदार वाहन संचालकों के ट्रेक्टरों को जब्त करने के बाद,बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया जा रहा है। वहीं,आर्थिक रूप से कमजोर वाहन मालिकों के ट्रेक्टरों को 15 दिन से अधिक समय से जब्त कर थाना में खड़ा कर दिया गया है और उन पर 10 हजार से अधिक राशि का शमन शुल्क जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। संघ के बैठक में इस प्रशासनिक भेदभाव का कड़ा विरोध किया किया गया। वाहन मालिकों ने एक स्वर में मांग किया जिस प्रकार,प्रशासन ने दो वाहनों को बिना जुर्माने का छोड़ा है,उसी प्रकार,जब्त किए गए सभी ट्रेक्टरों को छोड़ा जाए। जब तक प्रशासन,इस संबंध में अंतिम निर्णय नहीं ले लेता,वाहन मालिक,ढुलाई का काम बंद रखेगें। जानकारी के लिए बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार ने रेत घाट का संचालन,ग्राम पंचायतों को सौपें जाने के निर्णय के बाद,रेत घाट के निविदा का काम अधर में लटका हुआ है। जशपुर सहित पूरे प्रदेश में रेत,अवैध उत्खनन के भरोसे चल रहा है। इससे एक ओर जहां शासन को रोजाना करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है,वहीं अवैध वसूली के मकड़ जाल में उलझे,रेत कारोबार की वजह से उपभोक्ताओं को भी महंगे रेत खरीदने पड़ रहे हैं। रेत के इस मामले में रेत का परिवहन कर,अपनी आजीविका चलाने वाले वाहन मालिक,चालक और श्रमिक भी संकट में आ गए हैं। अवैध उत्खनन और परिवहन के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई से वाहन मालिकों को आर्थिक परेशानी से जुझना पड़ रहा है। इससे नाराज वाहन मालिकों ने शहर में रेत की ढुलाई से हाथ खिंच लिया है। ट्रक और ट्रेक्टर मालिक संघ ने रविवार को अपने बैठक में इस बात की पुरजोर मांग किया कि शासन प्रशासन पहले रेत घाट की व्यवस्था करे और नियमानुसार पीट पास जारी करें। इसके बाद,अगर कोई वाहन अवैध उत्खनन और परिवहन करते हुए पाया जाता है तो उसके विरूद्व कड़ी कार्रवाई करे। इसमें संघ को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन,जब तक घाट की व्यवस्था न हो,वाहन मालिक और इस पर आश्रित श्रमिकों की आजीविका का ख्याल प्रशासन को रखना ही होगा।

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