निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर एनएसयूआई जिला अध्यक्ष आरिफ हुसैन ने जताई चिंता

रायगढ़ । एनएसयूआई जिला अध्यक्ष एवं पार्षद श्री आरिफ हुसैन ने शहर के निजी स्कूलों द्वारा नए शिक्षण सत्र में बिना उचित मंजूरी के मनमाने ढंग से फीस बढ़ाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने शिक्षा विभाग से इस ओर तत्काल ध्यान देने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।

आरिफ के अनुसार, शहर के कई प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों ने ट्यूशन फीस, विकास शुल्क, परिवहन शुल्क के साथ-साथ विभिन्न नामों (जैसे ओरिएंटेशन फीस, एसी शुल्क, स्कूल ऐप शुल्क आदि) से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाला है। यह वृद्धि अक्सर शिक्षा निदेशालय द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना, 10% से 30% तक की जा रही है, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि यह मनमानी मध्यम एवं निर्बल वर्ग के अभिभावकों के लिए शिक्षा को दुष्प्रभावित करने वाली बन रही है। इसके अलावा, कुछ संस्थानों द्वारा अभिभावकों को विशिष्ट दुकानों से ही किताबें, वर्दी आदि खरीदने के लिए बाध्य किया जाना तथा अतिरिक्त कार्यक्रमों के नाम पर अनावश्यक खर्च थोपना भी गंभीर चिंता का विषय है। ऐसी प्रथाओं से संस्थानों द्वारा कमीशनखोरी जैसे गैर-पारदर्शी व्यवहार के संकेत मिलते हैं।

आरिफ ने जोर देकर कहा कि नियमों के अनुसार किसी भी फीस वृद्धि से पहले निदेशालय से अनुमति अनिवार्य है। सभी स्कूलों को अपना वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है। यदि वृद्धि अनुचित पाई जाती है, तो निदेशालय को न केवल इसे रद्द करना चाहिए, बल्कि वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस कराने का निर्देश भी देना चाहिए।

इस समस्या के स्थायी समाधान हेतु एनएसयूआई ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

1. प्रत्येक स्कूल को प्रत्येक कक्षा के लिए संपूर्ण फीस संरचना का विवरण अपनी वेबसाइट के साथ-साथ शिक्षा निदेशालय की वेबसाइट पर भी अपलोड करना अनिवार्य हो।
2. इससे अभिभावकों को विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने या सड़क पर उतरने की बजाय पारदर्शी तरीके से जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
3. फीस नियंत्रण एवं निगरानी हेतु स्पष्ट नियमावली बनाई जाए और उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

आरिफ हुसैन ने चेतावनी दी कि एनएसयूआई की टीम शहर के सभी निजी स्कूलों की फीस संरचना पर निरंतर निगरानी रखेगी। यदि किसी भी स्कूल द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाई गई या अभिभावकों का शोषण जारी रहा, तो संगठन इसके विरुद्ध कड़ा आंदोलन खड़ा करेगा और उनकी मान्यता रद्द करने की मांग शासन से करेगा। उन्होंने अभिभावकों से भी सजग रहने और ऐसी किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत एनएसयूआई को देने का आह्वान किया।

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