ई-चालान के दौर में ‘थाने’ की जिद: रायगढ़ में RTO उड़न दस्ते की कार्रवाई पर उठे सवाल

रायगढ़/धरमजयगढ़। डिजिटल इंडिया और ई-चालान जैसी पारदर्शी व्यवस्थाओं के बीच रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में परिवहन विभाग (RTO) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उड़न दस्ते की एक कार्रवाई के दौरान कर्मचारियों का संदिग्ध व्यवहार और कैमरे से बचने की कोशिश अब चर्चा का विषय बन गई है।


ई-चालान की जगह ‘थाने’ ले जाने का दबाव

जानकारी के अनुसार, RTO उड़न दस्ते ने गन्ना लदी एक माजदा गाड़ी को ओवरलोडिंग के संदेह में रोका। नियमों के मुताबिक, ऐसे मामलों में मौके पर ही POS मशीन के जरिए ई-चालान किया जाना चाहिए।

लेकिन आरोप है कि कार्रवाई कर रहे सिपाही ने चालान काटने के बजाय वाहन को धरमजयगढ़ थाने ले जाने का दबाव बनाया और खुद वाहन में बैठ गया। इस रवैये ने मौके पर मौजूद लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए।


कैमरे से बचते नजर आए कर्मचारी

घटनास्थल पर पहुंचे मीडियाकर्मियों को देखकर संबंधित सिपाही कैमरे से बचते नजर आया। उसने अपना नाम और पद बताने से इनकार कर दिया और वरिष्ठ अधिकारियों का संपर्क नंबर देने से भी कतराता रहा।

एक लोक सेवक का इस तरह पहचान छिपाना और जवाबदेही से बचना, कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।


पुलिस को भी नहीं थी जानकारी

जिस थाने का हवाला देकर वाहन ले जाने की बात कही जा रही थी, उसी थाना प्रभारी ने इस मामले से अनभिज्ञता जताई। थाना प्रभारी सीताराम ध्रुव ने स्पष्ट कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई थी।


अधिकारी मौन, सवाल बढ़े

मामले में RTO उड़न दस्ता अधिकारी सुजीत सिन्हा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। अधिकारियों की यह चुप्पी पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना रही है।


उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल

  • जब ई-चालान की व्यवस्था है, तो वाहन को थाने ले जाने का दबाव क्यों?
  • सरकारी कर्मचारी कैमरे से क्यों बच रहा था?
  • स्थानीय पुलिस को सूचना दिए बिना कार्रवाई कैसे की जा रही थी?

जांच की मांग तेज

यह मामला केवल एक वाहन कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल बन गया है। अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करें।


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