
रायगढ़ में गणेश चतुर्थी पर भव्य कार्यक्रम राज घराने द्वारा राजशाही काल से किया जाता रहा है। परंतु शासन प्रायोजित चक्रधर समारोह का आयोजन मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा 80 के दशक में प्रारंभ हुआ उस समय छत्तीसगढ़ अलग प्रदेश के रूप में अस्तित्व में नहीं आया था। उस समय रायपुर से सांसद श्री केयूर भूषण थे और चक्रधर समारोह प्रारंभ करवाने में उनका महत्व पूर्ण रोल था, साथ ही साथ रायगढ़ राज घराने की भी मेहनत और ईमानदारी से किया गया प्रयास से भी इंकार नही किया जा सकता है।
इस चक्रधर समारोह को आयोजित किए जाने के पीछे मूल उद्देश्य भारतीय कला को विकसित करना और जीवित रखना था ,और जनता को आयोजन का लाभ प्राप्त होता रहे । परंतु यह आयोजन अधिकारियों और नेताओं का बन कर रह गया है। इस कार्यक्रम का बकायदा निमंत्रण पत्र चुने हुए लोगों को मिलता है, प्रवेश निमंत्रण पत्र के आधार पर ही होता है।आम लोगों को प्रवेश मिल ही नहीं पाता है। आम आदमी को दूर से प्रोग्राम देखना है तो कीचड़ से सने में मैदान में पहुंचना पड़ता है। यह आयोजन अधिकारियों और नेताओं का बन कर रह गया है। जबकि आयोजन में जो पैसा खर्च किया जा रहा है,आम आदमी के द्वारा टैक्स के रूप में सरकार के खजाने में जमा कर दिया गया है। कार्यक्रम जितने दिन चलेगा नेताओं और अफसरों के मनोरंजन का आयोजन बन कर रह गया है।




