ये रायपुर का टीकाकरण केंद्र है, भाठागांव के इस सेंटर में जब गरीबी रेखा का कार्ड न होने की वजह से लोगों को वापस भेजा जाने लगा तो गुस्साए लोगों की अफसरों से बहस हो गई।
रायपुर के भाटागांव इलाके में आंगनबाड़ी को 18 से 44 साल तक के लोगों के लिए टीकाकरण केंद्र बनाया गया है। करीब 1 घंटे की देरी से यहां टीकाकरण शुरू हुआ। मगर इसके शुरू होते ही विवाद भी खड़ा हो गया। पहले से ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा चुके लोगों को सेंटर में टीका लगाने से मना कर दिया गया। सरकारी फरमान के मुताबिक टीका सबसे पहले 18 से 44 साल तक के उन लोगों को लगेगा जिनके पास गरीबी रेखा से नीचे वाला राशन कार्ड है। ऐसे लोगों को ही प्राथमिकता दी जा रही है। मिडिल क्लास वर्ग के लोगों को केंद्रों से लौटाया जा रहा है। उनसे कहा जा रहा है- सॉरी आपको टीका नहीं लगेगा, दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों की स्वास्थ्यकर्मियों से तीखी बहस हो गई।
पंडरी के केंद्र में टीका लगवाने आए युवक को सरकारी नियम की वजह से निराशा हाथ लगी।
पंडरी के केंद्र में टीका लगवाने आए युवक को सरकारी नियम की वजह से निराशा हाथ लगी।
वोट के वक्त तो भेदभाव नहीं होता
पंडरी जिला अस्प्ताल में अपने पिता और बहनों के साथ टीका लगवाने पहुंचे 23 साल के एक युवक ने बताया कि गुजरात में रहने वाले उसके रिश्तेदारों को शनिवार की सुबह टीका लग चुका । मगर यहां गरीबी रेखा वाला कार्ड मांगा जा रहा है। जब वोट मांगना होता है तब तो नेता अमीर-गरीब का भेदभाव नहीं करते तो फिर टीकाकरण में ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
सरकार का लॉजिक समझिए
वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए सामाजिक-आर्थिक स्तर पर प्राथमिकता देने का भी ऐलान किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने बताया, वैक्सीन की कमी को देखते हुए एक बड़ी आबादी को वैक्सीन लगाना मुमकिन नहीं है। ऐसे में जो वैक्सीन सरकार के पास उपलब्ध है उसी के साथ वैक्सीनेशन प्रोग्राम सीमित सेंटर्स पर शुरू किए जाएंगे। इस टीकाकरण में सामाजिक न्याय का ध्यान रखा जाएगा। सबसे पहले अन्त्योदय राशन कार्ड वाले अति गरीब लोगों में से 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को यह टीका लगेगा। उसके बाद BPL कार्ड धारी गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को टीका लगाया जाएगा। सबसे बाद में सामान्य (APL) कार्ड वाले लोगों को इसका लाभ मिलेगा।सुबह से कोई जानकारी देने वाला नहीं था
भाठागांव के केंद्र का शनिवार की दोपहर इस केंद्र का जायजा लेने पर पता चला कि यहां कोई इंतजाम नहीं था। दो बजे से टीकाकरण तय था। 12 बजे तक यहां कोई बंदोबस्त नहीं दिखा। पुलिस स्टाफ की ड्यूटी समय से पहले लगी हुई थी। मगर इस केंद्र में टीका लगवाने के लिए आ रहे लोगों को कोई जानकारी आंगनबाड़ी में नहीं मिली।आंगनबाड़ी के पास बने स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने भी कह दिया कि आंगनबाड़ी में कौन टीका लगाएगा, वहां जानकारी कौन देगा, ये हमें नहीं पता। कुछ देर धूप में भटककर लोग घरों को लौट गए। एक कमरे की इस आंगनबाड़ी में सिर्फ एक खाली कुर्सी रखी थी, कमरे का खालीपन सरकारी सिस्टम की लचर हालत की कहानी कहने को काफी था। दोपहर बाद यहां बंदोबस्त किया गया। बाहर टेंट लगा और स्वास्थ्य कर्मी पहुंचे।