Raigarh News : रायगढ़ लोकसभा चुनाव में अब तक कौन क्या पाया क्या खोया?

Raigarh News : रायगढ़ : जैसे जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, जहां सह गर्मी बढ़नी चाहिए थी राजनीति पार्टियों में हलचल होनी चाहिए थी राजनीति पर बढ़ाना चाहिए था लेकिन राजनीती पार्टियों की गतिवधि नजर नही आ रही है। कुछ महीने ही पहले विधानसभा चुनाव हुवे तब चुनाव की गतिविधियां को याद करे तो अभी की चुनावी गर्मी भरी गर्मी में ठंडी नजर आ रही है जो बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर रही है। क्या यह रायगढ़ विधानसभा सामान्य और रायगढ़ लोकसभा आदिवासी होने का फर्क कारण है, या प्रत्याशी का चेहरा कारण है। आज के दिन चुनाव को देखे तो मतदान दिनांक एक सप्ताह से भी काम बच गया है कही कुछ स्पष्ट नजर नहीं आ रहा है, विभिन्न राजनीतिक दल घर घर जाकर संपर्क करके अपने लिए वोट मांगते रहे है, साथ ही मतदाता पर्ची घर घर जाकर वितरित किया करते थे,परंतु न तो कांग्रेस और न ही भारतीय जनता पार्टी ने पर्ची घर घर पहुंचाने की कवायद प्रारंभ अभी तक नही की है।

उत्साह की कमी :

वही ऐसा भी समझ में आ रहा है की भारतीय जनता पार्टी अति आत्म विश्वास में है और उनके आला नेता का प्रचार प्रसार दिख तो रहा है प्रदेश के मुखिया तमनार और खरसिया में आकर जनसभा को संबोधित किए राजनीतिक पारा बढ़ती धूप और तेज गर्मी की तरह हलका फूलका देखने को मिल रहा है लेकिन कही न कही नाकाफी साबित हो रहा है ऐसा प्रतीत होता है कीइस बार का लोकसभा ढीला ढीला ही रहेगा

काग्रेसी की तो विडंबना ही अलग है :

पिछले कई चुनाव कांग्रेस ने लड़ा है और जीत हासिल भी किया अमूमन यह देखा गया है कि जो भी प्रत्याशी विधानसभा का हो या लोकसभा का हमेशा कार्यकर्ताओं के मान मनवल के लिए घर तक पहुंचता है लेकिन कई ऐसे भी कार्यकर्ता होते हैं जो मान मनवल के बाद भी पार्टी के लिए कार्य नहीं करते पहली बार रायगढ़ लोकसभा में देखने को मिला है कि कांग्रेसी कार्यकर्ता पहले से उत्साहित होकर समर्पित भाव से कांग्रेस के लिए कार्य करना चाहते हैं लेकिन प्रत्याशी ही गायब है यह भी कहना कहीं गलत नहीं होगा कि प्रत्याशी के तरफ से कार्यकर्ताओं को अभी तक दिशा निर्देश भी जारी नहीं किया गया है ऐसे में कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट ना जायज है जिसका खामियाजा कांग्रेस और लोकसभा प्रत्याशी को भुगतना पड़ेगा जहां अन्य छोटी से छोटी क्षेत्रीय पाटियों का झंडा पोस्टर बैनर लग चुका है वहीं कांग्रेसी कार्यकर्ता झंडा पोस्टर का अभी इंतजार कर रहे हैं या फिर जो समर्पित कार्यकर्ता है उनको दरकिनार किया जा रहा है

कांग्रेसी लोकसभा प्रत्याशी डॉक्टर मेनका सिंह का क्या कहने :

डॉक्टर मेनका सिंह अभी बीवी आज से 25 साल पुराने चुनाव के ढरे को देख रही है जहां उनकी बहन पुष्पा देवी को आसानी से जीत हासिल हो गई थी उसे समय इंदिरा गांधी और कांग्रेस के नाम पर वोट पढ़ते थे इस अंदाज पर कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी मेनका सिंह चल रही है उनको लगता है कि वैसे ही इस बार भी होगा लेकिन शायद यह उनकी भूल है उनको समझाने वाला कोई नहीं है रायगढ़ लोकसभा को हल्के में ले रही हैं रायगढ़ लोकसभा चुनाव को लेकर उनका रविया ढीला डाला ही नजर आ रहा है जो कांग्रेस के लिए समर्पित कार्यकर्ता को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर करें तो क्या करें क्योंकि कांग्रेसी प्रत्याशी को सिर्फ और सिर्फ अपने आप पर भरोसा है अगर लोकसभा चुनाव में इच्छा के विपरीत अगर नतीजा आता है तो क्या आला कमान पुराने ढरे के अनुसार छोटे कार्यकर्ताओं को ही बाली देंगे या फिर लोकसभा के जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई करेंगे यह देखने वाली बात होंगी

इस बार बराबर का आंकड़ा सिर्फ

Raigarh News : पिछले लोकसभा चुनाव में आठ के आठो विधानसभा में कांग्रेस का कब्जा था फिर भी पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 50000 से ज्यादा वोट से हार गई थी इस बार तो रायगढ़ लोकसभा में 8 विधानसभा आती है,उसमें 4विधानसभा में कांग्रेस के विधायक है 4 विधानसभा में भाजपा के विधायक हैं, याने बराबर बराबर की पोजीशन है, बड़त सिर्फ राज्य में भाजपा की सरकार है। रायगढ़ विधानसभा में जो बड़त मिलेगी उसी पर लोकसभा का नतीजा तय होगा,2019 के लोकसभा चुनाव में रायगढ़ विधानसभा में 50हजार की लगभग लिड मिली थी, उसी से चुनावी नतीजा निर्धारित हुए थे। इस बार भी ऐसा ही होगा चुनावी गलियारे में यह चर्चा व्याप्त है। इसके साथ साथ अंतिम दिनों में चुनावी हलचल और चुनाव लडने वाले प्रत्याशियों की रणनीति पर रिज़ल्ट निर्भर रहने वाला है।

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