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India-Russia: दो दशक से भी ज्यादा पुराना पुतिन-मोदी का याराना, 2001 में गुजरात के CM रहते पहली बार रूस गए थे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की दोस्ती दो दशक से भी ज्यादा पुरानी है। गुजतरात के सीएम रहते हुए 2001 में पहली बार नरेंद्र मोदी रूस की यात्रा पर गए थे।

लंबे समय से चले आ रहे भारत-रूस के मित्रतापूर्ण संबंधों की जड़ें बहुत गहरी हैं। अलग-अलग दौर में अलग-अलग नेताओं ने दोस्ती के इस वटवृक्ष को सींचा है। नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस समय से ही भारत-रूस संबंधों की मजबूती के कड़ी बने रहे हैं। 6 नवंबर, 2001 को मोदी पहली बार रूस गए, तब वे गुजरात के सीएम थे। तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ भारत-रूस शिखर सम्मेलन के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के तौर पर पहली बार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिले।

2019 में मोदी बतौर पीएम रूस गए, तो उन्होंने गुजरात के सीएम के तौर पर की गई अपनी रूस यात्रा को याद करते हुए कहा था, मैं एक राज्य का मुख्यमंत्री थे और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपेक्षाकृत नया था, इसके बावजूद राष्ट्रपति पुतिन बेहद सम्मान से पेश आए, जिससे दोनों नेताओं के बीच स्थायी दोस्ती का द्वार खुला।
बाद के वर्षों में मोदी ने रूस की कई यात्राएं कीं। 2006 में मोदी ने आस्त्राखान का दौरा किया और गवर्नर अलेक्जेंडर झिलकिन से मुलाकात कर पूर्व के प्रोटोकॉल समझौते को पांच वर्षों के लिए बढ़ाया। 2009 में वे चौथे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सप्ताह को संबोधित करने तथा 9वें रूसी तेल एवं गैस सप्ताह सम्मेलन में मुख्य भाषण देने के लिए आमंत्रित किए गए। वहां, मुख्यमंत्री मोदी ने रूसी भाषा में प्रस्तुति देकर रूसी व्यापारियों को चकित कर दिया। इन मुलाकातों से गुजरात-रूस के बीच ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल क्षेत्रों में साझेदारी की जो नींव रखी गई आज उस मजबूत नींव पर बने रिश्ते का लाभ पूरे देश को मिल रहा है।

दबाव भी…यूक्रेन संघर्ष पर कहा था, युद्ध का युग नहीं
पीएम मोदी और पुतिन ने आखिरी बार 16 सितंबर, 2022 को उज्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के इतर द्विपक्षीय वार्ता की थी। तब मोदी ने यूक्रेन में संघर्ष को समाप्त करने के लिए पुतिन पर दबाव डालते हुए कहा था, आज का युग युद्ध का नहीं है। फरवरी, 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से मोदी ने पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ फोन पर कई बार बातचीत की है। हालांकि रूस संग मजबूत दोस्ती के चलते भारत ने अभी तक हमले की निंदा नहीं की है।

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