
छत्तीसगढ़ में DMF (जिला खनिज प्रतिष्ठान) और आबकारी विभाग से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामलों की जांच के लिए ACB–EOW ने रविवार सुबह बड़े स्तर पर छापेमारी अभियान की शुरुआत की। राज्यस्तरीय समन्वय के साथ यह कार्रवाई रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और कोंडागांव सहित 18 से अधिक ठिकानों पर एकसाथ चल रही है। दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच जारी है।
पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास के ठिकाने बने मुख्य केंद्र
सूत्रों के अनुसार, छापेमारी का सबसे बड़ा फोकस पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास के आवास और उनसे जुड़े परिसरों पर है। टीमें यहां से बड़ी मात्रा में दस्तावेज, लेनदेन विवरण, अकाउंट रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरण जब्त कर रही हैं। अधिकारियों को आशंका है कि आबकारी घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबूत इन्हीं ठिकानों से मिल सकते हैं।
व्यापारी हरपाल अरोरा और उद्योगपति अशोक टूटेजा पर भी दबिश
कार्रवाई का दायरा प्रशासनिक अधिकारियों तक सीमित नहीं है।
- रायपुर में कारोबारी हरपाल अरोरा के घर और व्यवसायिक परिसरों पर छापा
- बिलासपुर में उद्योगपति अशोक टूटेजा के ठिकानों की तलाशी जारी
जांच टीम बैंक ट्रांजेक्शन, संपत्ति का विवरण, अकाउंट बुक और आय के स्रोतों की बारीकी से जांच कर रही है।
अंबिकापुर, कोंडागांव सहित कई जिलों में एकसाथ कार्रवाई
ACB–EOW ने अंबिकापुर, कोंडागांव और आसपास के क्षेत्रों में भी टीमें तैनात की हैं। संदिग्ध नेटवर्क के आधार पर छापेमारी टीमों को कई हिस्सों में विभाजित किया गया है, ताकि हर लिंक्ड लोकेशन से सबूतों को सुरक्षित किया जा सके।
कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हलचल
छापेमारी की सूचना मिलने के बाद सरकारी विभागों और व्यापारी समुदाय में खलबली मच गई है। हालांकि ACB–EOW की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन प्राथमिक जांच के आधार पर यह अभियान लंबा चलने की संभावना जताई जा रही है। आगे और ठिकाने रडार पर आ सकते हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का कड़ा रुख
DMF और आबकारी घोटाले को लेकर पिछले कुछ महीनों से लगातार जांच की मांग उठ रही थी। ऐसे में यह समन्वित छापेमारी राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति सख्त नीति का संकेत दे रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और बड़े खुलासे और कार्रवाई देखने को मिल सकते हैं।




